
दीर्घकालिक प्रयोग कृषि प्रणालियों में भूमि उपयोग और प्रबंधन में बदलावों के असर को लेकर एक नया नजरिया देते हैं। ये प्रभाव अक्सर लंबी अवधि वाले होते हैं और इनमें विविधिता की एक खूबी भी होती है। ऐसा केवल लंबे समय तक डेटा इकट्टा करने से हो सकता है, जैसा कि रुझानों से साफ जाहिर है। इस तरह के डेटा का इस्तेमाल फसल/मिट्टी की प्रणाली में बदलावों के प्रभावों को समझने के लिए मॉडल विकसित करने और जांच के लिए किया जा सकता है। ऐसे प्रयोग खाद्य उत्पादन को बनाए रखने के लिए जरूरी अहम कारकों को साक्षात रूप से दिखाने का भी काम करते हैं। ब्रॉडबल्क जॉन लॉज और हेनरी गिल्बर्ट की ओर से 1843 से 1856 के बीच शुरू किए गए कृषि क्षेत्र के विभिन्न प्रयोगों में से एक है। लॉज ने अपने उर्वरक उत्पादन कारोबार से प्रयोगों को आर्थिक मदद मुहैया कराई। उन्होंने इसके लिए लॉज एग्रीकल्चर ट्रस्ट बनाया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनकी मृत्यु के बाद भी यह जारी रहे। आगे चलकर प्रयोगों के प्रबंधन का जिम्मा ब्रिटिश सरकार ने ले लिया, ताकि कृषि अनुसंधान और विकास को मदद की जा सके। कुछ प्रयोग आज भी जारी हैं। इन्हें ब्रिटेन बायोटेक्नॉलजी एंड बायोलॉजिकल साइंसेज रिसर्च काउंसिल (यूके रिसर्च एंड इनोवेशन का एक हिस्सा) और लॉज एग्रीकल्चर ट्रस्ट की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर मदद दी जाती है, जिसका इस्तेमाल ब्रिटेन और विदेशों के वैज्ञानिक नए कृषि-अर्थशास्त्र के शोधों के लिए करते हैं। अधिक उपज वाली फसल की किस्मों का इस्तेमाल करते हुए उर्वरकों, चूने और कीटनाशकों के पर्याप्त इनपुट के साथ कई पीढ़ियों तक एक ही जगह फसलों का उत्पादन किया जा सकता है। हालांकि, जरूरी पैदावार के लिए उर्वरकों का इनपुट फसल की आवश्यकताओं के लिहाज से बहुत अधिक है और जैविक खाद पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ नहीं है। नतीजतन, पोषक तत्वों के आदान-प्रदान का प्रबंधन अहम हो जाता है, चाहे वह खनिज उर्वरक हों या जैविक खाद, हमें फसल की जरूरत के हिसाब से सावधानी से इनका इस्तेमाल करना चाहिए। जैविक खादों के अच्छे प्रबंधन के अलावा, फसलों के अवशेषों का प्रबंधन करना भी महत्वपूर्ण है। ब्रॉडबल्क में एक संकेत है कि खनिज उर्वरकों के इनपुट, विशेष रूप से एन और पी की वजह से मिट्टी में जैविक सी और एन तत्वों में मामूली बढ़ोतरी हुई है। ऐसा शायद फसल की उपज में बढ़ोतरी के कारण और जड़ों व ठूंठ के रूप में फसल के अवशेषों की वृद्धि की वजह से हुआ है। ये बढ़ोतरी मिट्टी की जुताई के लिए ऊर्जा में कमी के साथ जुड़ी थी। अन्य दीर्घकालिक अध्ययनों से पता चला है कि पुआल निकलने से मिट्टी में जैविक सी और मृदा माइक्रोबियल बायोमास में कम वृद्धि हुई है। इस बात के प्रमाण हैं कि इनसे मिट्टी की सेहत पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है। इससे स्थिरता, पानी का सही तरीके अवशोषण और जुताई का तरीका शामिल है। नतीजतन, मिट्टी में फसलों के अवशेषों को शामिल करने से मिट्टी की सेहत काफी अच्छी हो सकती है। ब्रॉडबल्क प्रयोग से पता चलता है कि खनिज उर्वरक और जैविक खाद दोनों फसल उत्पादन के लिए फायदेमंद हैं। गेहूं की पैदावार में अदल-बदल कर खेती करने से खेतों में खाद और खनिज उर्वरक या अकेले खनिज उर्वरकों की उच्च दर समान होती है। हालांकि, जैविक खाद की उपलब्धता कम है, ऐसे में ब्रॉडबल्क पर इस्तेमाल होने वाली वार्षिक फार्मयार्ड खाद के इनपुट का उपयोग मौजूदा कमर्शल माहौल में किया जा सकता है।