MANISH BAFANA — केंद्रीय कृषि मंत्रालय नया कीटनाशक कानून लाने की जोर-जोर से तैयारी कर रहा है । बताया
जाता है कि ,यह कानून नकली कीटनाशक बनाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करेगा । वर्तमान का कीटनाशक अधिनियम
काफी कमजोर है ,अमानक खेती दवाई कीटनाशक पाए जाने पर उत्पादन कर्त्ता और विक्रय कर्त्ता पर कोई विशेष कार्यवाही
नहीं होती है। केवल छोटा सा जुर्माना देख छूट जाते हैं। केंद्रीय कृषि मंत्रालय अब कम जहरीले कीटनाशक बनाने वालों के
खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी करते हुए, एक नया कीटनाशक अधिनियम लाने वाला है। जिसकी जानकारी स्वयं
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जोर-जोर से कई मंचों से की है और कहा है कम जहरीला कीटनाशक वालों को बहुत
कड़ी सजा दे देंगे।
“””””वैसे भी पूरे भारत में कीटनाशक का उपयोग लगता तेजी से बढ़ रहा है ,बताया जाता है
कि 65000 मेट्रिक टन प्रतिवर्ष खेतों में उपयोग होता है | और प्रतिवर्ष की कीटनाशक की
खपत बढ़ती जा रही है | वर्तमान में 1000 से अधिक कीटनाशक रसायन का पंजीयन
होकर बाजार में विक्रय किया जा रहा है | “”””””
केंद्रीय कृषि मंत्रालय को ऐसी क्या आवश्यकता महसूस हो गई कि उन्हें सख्त कानून बनाने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है |
बताया जाता है कि ,कृषि मंत्री को किसी सरकारी अधिकारी ने यह कान में बात बता दी कि, देशभर में कम जहरीला
कीटनाशक बहुत बिक रहा है | पर यह बात बताना वह अधिकारी भूल गए हैं कि, देशभर में कैंसर के अस्पताल भी बहुत ज्यादा
खुल गए हैं | अधिकारियों को और मंत्री को यह मालूम नहीं होगा कि देश की मिट्टी की उर्वरक क्षमता भी अत्यधिक कीटनाशक
डालने के कारण उसकी पोषकता खत्म हो गई है | कीटनाशक को अधिक गुणवत्ता में और सुधार करने की और कोशिश की जाती
है तो पूरे भारत में 90 हजार मेट्रिक टन पेस्टिसाइड का उपयोग पूरे देश के खेतों में होगा व भी 1 वर्ष……….
केंद्रीय कीटनाशक पंजीयन और रजिस्ट्रेशन समिति रोज नए-नए फार्मूले के कीटनाशक के पंजीयन कर रही है और उसमें भी
अधिक गैर जरूरी कीटनाशकों का पंजीयन किया जा रहा है । बताया जाता है कि अब कई कांबिनेशन वाले पेस्टिसाइड का
उपयोग भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
“”””””गुणवत्ता की आड़ में लोगों के खून में कीटनाशक भेजने का एक नया फार्मूला सरकार ने निकाला है
। गुणवत्ता युक्त कीटनाशक का उपयोग अधिक से अधिक हो परंतु यह मानकता वाला कीटनाशक जहरीले
पर जहरीला बनता जा रहा है। कई कीटनाशक पहले केवल 10% के उपयोग करने से कीटों की रोकथाम
हो जाती थी परंतु अब उसको 50% वाला कीटनाशक बना दिया गया है । “””””””
कई कीटनाशक केवल 20% पर भी अच्छा काम करते थे ,इसकी मारक क्षमता और बढ़कर 60% तक कर दी गई है । यह जहर
कितने लोगों की जान लेगा ……कितने लोगों को कैंसर हो जाएगा…….. कितने लोगों का ब्लड प्रेशर बढ़ाएगा ……कितने लोगों
का शुगर बढ़ाएगा ….कितने लोगों के किडनी खराब करेगा….. कभी भी कृषि मंत्रालय ने इस पर गौर नहीं किया ? वर्तमान के
कृषि मंत्री अब नए सख्त कानून लाने वाले हैं। जिससे कंपनियों को गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अधिक से अधिक कीटनाशक
तकनीकी का उपयोग करना पड़ेगा | परन्तु यह भी गजब है की पुरे देश में कीटनाशक के फेल होने से कितना बड़ा नुकसान
हुआ है इसका कोई बड़ा आंकड़ा सरकार के पास नहीं है | परंतु अधिक जहरीले कीटनाशक के कारण कितने लोग मरे हैं , चाहे
वह केरल में हो चाहे हो भोपाल में हो, यह सरकार को स्थिति से समझना चाहिए |
जहां कई फार्मास्यूटिकल कंपनी की जीवन रक्षक मेडिसिन के नमूने फेल हो रहे
हैं ,बताया जाता है कि मध्य प्रदेश में अभी वर्तमान में 240 मेडिसिन के सैंपल
फेल हुए हैं । परंतु कोई कार्यवाही सरकार द्वारा नहीं की गई। फार्मास्यूटिकल
पर सख्त कानून नहीं है । परंतु भारत का कृषि मंत्रालय जहरीला कीटनाशक को
और पावरफुल बनाने के लिए सख्त कानून बनाने के लिए बेचैन है । …. क्या कोई
विदेशी कंपनी इसके पीछे खड़ी है ? …जो चाहती है कि भारत में क्वालिटी के नाम पर अधिक से अधिक जहर परोसा जाए |
कई कीटनाशक खेतों में जाने के बाद बरसात से घुलकर नदियों में पहुंच जाते हैं वहां से पेयजल के रूप में घर-घर तक लोगों तक
पहुंच रहा है |
Buprofezin 25 % को 75 % तक बढ़ा दिया
Chlorpyrifos 10 % को 75% तक बढ़ा दिया
Cypermethrin 10 % को 25% तक बढ़ा दिया
Deltamethrin 01.80 % EC को 20% तक बढ़ा दिया
पैDinotefuran 20 % से 70% तक बढ़ा दिया
Fipronil 05 % को 20 % तक बढ़ा दिया
Imidacloprid 17.80 % को 75% तक बढ़ा दिया
केवल क्वालिटी वाला जहर खेतों में पहुंचे इसकी चिंता सरकार को है | कई कीटनाशक कम प्रतिशत में भी अच्छा काम कर रहे थे
परंतु विदेशी कंपनियां के दबाव में उसका प्रतिशत पहले से कई अधिक बढ़ा दिया गया जैसे की
ऐसे कई 200 से 300 की कीटनाशक है जो कम प्रतिशत पर भी
अच्छे कारगर है परंतु विदेशी कंपनियों ने अपने आर्थिक लाभ को
देखकर ऐसे डाटा रजिस्ट्रेशन समिति को दे दिए हैं और उच्च
सांद्रता वाले कीटनाशकों का पंजीयन कराकर पूरे देश भर में जहर
का वातावरण पैदा कर दिया गया है। देखा जाए तो अब भारत के
नागरिक प्रदूषण के खतरे से तो जूझ रहे हैं पर एक नया कीटनाशक
का प्रदूषण भी जल्दी लोगों को मौत की नींद सुलाने में अपनी
भूमिका अदा करने वाला है । जहर में कभी भी गुणवत्ता नहीं ढूंढनी
चाहिए …. जहर पौधों के लिए कीटों के लिए नुकसान दे है तो यह
मनुष्य के लिए कोई फायदेमंद नहीं होता है……. जब कम प्रतिशत
वाले जहर से भी सफलतापूर्वक खेती की जा सकती है तो गुणवत्ता
के नाम पर एक नया कानून लाकर डरा धमका कर सख्त सजा का
प्रावधान बात करके जहर को उच्च गुणवत्ता देने का कार्य करना
प्रकृति के साथ न्याय नहीं है यह प्रकृति और मनुष्य के साथ अन्याय है।