किसानो का हमदर्द ‘राज्य कृषक आयोग’ का दर्द कब होगा —- दूर

manish bafana -इस वर्ष मध्य प्रदेश सरकार 2026 को किसान कल्याण दिवस के रूप में बनाने की घोषणा कर चुकी है! मध्य प्रदेश सरकार 2026 में किसानों के कल्याण के लिए कई योजना लेकर आ रही है और किसानों को उनकी उपज का अधिकतम मूल्य देने की ओर आगे बढ़ रही है !

किसान कल्याण वर्ष तभी सुशोभित कल्याणकारी होगा जब किसानों की आवाज सरकार तक पहुंचेगी और उस पर सरकार गंभीरता से विचार करते हुए उसका पालन करेगी साथ ही किसान हित में कई निर्णय लेगी | किसानो को अब किसी काम के लिए लाइन में खड़े नहीं रहना होगा तभी यह वर्ष किसान कल्याण कहलाएगा | परंतु सबसे अचंभित करने वाली बात जो सामने आ रही है ,,, किसान और सरकार के बीच में एक आयोग होता है जिसका नाम है “राज्य कृषक आयोग” यह आयोग किसानो की समस्याओं को सुनता है और अपनी सिफारिश राज्य सरकार को देता है |राज्य सरकार कृषक आयोग की सिफारिश को गंभीरता से लेती है और उस पर कार्य करती है |राज्य कृषक आयोग वह कड़ी है जो किसान और सरकार के बीच में एक पुलिया का काम करती है|

परंतु बड़ी विडंबना है कि 2019 के बाद से राज्य कृषक आयोग पर ताला डाला दिया है राज्य कृषक आयोग के कमरे के रोशनदान बंद है|

2019 में कमलनाथ सरकार ने राज्य कृषक आयोग को बंद कर दिया और उसकी जगह मध्य प्रदेश कृषि सलाहकार परिषद बनाई गई परंतु अब वह भी नहीं दिखती l शिवराज सरकार ने २००६ में राज्य कृषक आयोग बना था ! जिसके प्रथम अध्यक्ष श्री पाठक जी ने पूरे प्रदेश में दौरा करके किसानों की समस्या को जाना था |और अपनी सिफारिश को राज्य सरकार और केंद्र सरकार को भेजी! उनमें से कई सिफारिशें को मोदी सरकार ने 2014 में पूरा किया !

राज्य कृषक आयोग के अंतिम अध्यक्ष श्री कैलाश पाटीदार को 2013 में बनाया गया था |

फिर इसके बाद कोई भी इसका अध्यक्ष नहीं बना या नहीं बनाया गया |

जैसा की राष्ट्रीय कृषि आयोग का नाम भी अब अधिकांश संगठन भूल चुके हैं | वह भी अब बंद है ,,,जिसके अध्यक्ष पहले कभी डॉ ऍम एस स्वामीनाथन थे | राष्ट्रीय कृषि आयोग का गठन 2004 में हुआ था | स्वामीनाथन ने किसानों की स्थिति में सुधार के लिए महत्वपूर्ण सिफारिश दी थी जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य को C2 + 50% तय करना भी शामिल था ! आज के दौर में डॉक्टर स्वामीनाथन को हमेश याद किया जाता है|

उनकी सिफारिश से कृषि क्षेत्र में कई बदलाव आए हैं ! उनके भागीरथ प्रयासों के कारण उन्हें भारत रत्न दिया गया !

मध्य प्रदेश के राज्य कृषक आयोग पर क्यों ताले लगे हुए हैं ??अभी तक इसका कारण सामने नहीं आ पा रहा है??

जबकि मध्य प्रदेश में जातियों के आधार पर,,, समाज के आधारों,, पर कई आयोग बने हुए हैं |

जैसे की सामान्य वर्ग कल्याण आयोग ,अनुसूचित जाति आयोग ,राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग

महिला आयोग, यह बात सही है कि, किसानों की कोई जात या धर्म नहीं होता है | इसलिए धार्मिक चश्मे से देखा जाए तो ,,,,या जातिगत नजरिया से देखा जाए तो …किसान की ना कोई जात होती है ना कोई धर्म होता है |केवल वह हल पकड़ना जानता है और धरती से अनाज उगाकर लोगों का पेट भरना जानता है |

ऐसी क्या मजबूरी है की केंद्र स्तर पर राष्ट्रीय कृषि आयोग में कोई अध्यक्ष अभी तक नहीं बना | इसी प्रकार मध्य प्रदेश में राज्य कृषक आयोग में अभी तक कोई अध्यक्ष नहीं बना |

राज्य सरकारी भी नहीं चाहती है ? किसान के मुद्दों को लेकर सिफारिश जारी करने वाला आयोग कही राज्य सरकार को कभी संकट में ना डाल दे ……..

किसान समुदाय का आकार भी बहुत बड़ा होता है उसकी भी बहुत समस्या होती है, सरकार कभी नहीं चाहेगी कि इतने बड़े वर्ग का कोई प्रतिनिधित्व सामने उभर कर आए ????

और आयोग की सिफारिश से कोई राजनीतिक संकट खड़ा हो …..

परंतु सरकारों को चाहिए कि सरकार व किसान के बीच में कोई ऐसा संवैधानिक पद वाला आयोग बने जो हमेशा किसानों से अपनी चर्चा करते हुए किसानों की बातों को कंप्लिंग करें !

पर आमतौर पर प्रदेश सरकार राज्य कृषक आयोग को प्रभावशाली बनाने की जरूरत महसूस नहीं करती है !|||

राज्य सरकार सोचती है कि, यह राज्य कृषक आयोग कभी सरकार के लिए परेशानी का सबब नहीं बन जाए ??

2026 वर्ष कृषक कल्याण वर्ष जो खुशी का है,,,, यदि राज्य सरकार इस वर्ष राज्य कृषक आयोग के ताले खोल दे ..और किसानों के प्रति गंभीर व्यक्ति को अध्यक्ष बना दे ! निश्चित ही यह वर्ष किसान कल्याण वर्ष में एक अच्छा संकेत माना जाएगा ! वैसे भी कई राज्यों में राज्य कृषक आयोग संचालित है ! राज्य कृषक आयोग को संवैधानिक दर्जा मिले और उसको कुछ ऐसे अधिकार मिले जब कोई किसान अति गंभीर अवस्था या मृत्यु तक का कदम उठाना पड़े ऐसे समय में राज्य कृषक आयोग अपने दायित्व को पूरा करें ! जैसे की मानव अधिकार आयोग, महिला आयोग पीड़िता के लिए अपनी जिम्मेदारी को पूरी करते हैं! वैसे ही राज्य कृषक आयोग किसानों की पीड़ा के लिए अपनी जिम्मेदारी को ओढे सके | ‘राज्य कृषक आयोग’ किसानों के लिए एक आशावादी विश्वसनीय मंच बन सकता है!

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