सरकार ने फैसले पर लगाई रोक
manish bafana मध्य प्रदेश का कृषि विभाग रासायनिक उर्वरक की आपूर्ति को सुनिश्चित और पर्याप्त
बनाने में कमर कस रहा है! इसी प्रयास में राज्य शासन ने एक नया E टोकन वितरण प्रणाली निर्मित की है
जिसे E विकास एमपी कृषि की वेबसाइट से किसान खाद की मात्रा अपनी फसल के आधार पर खरीद
सकता है !
राज्य शासन व्यवस्थाओं को सुचारित करने के चक्कर में वितरण प्रणाली को ऑनलाइन कर तो देती है परंतु
यह भूल जाती है कि यह माथा-पची पूरी की पूरी ऑनलाइन प्रणाली किसानों के लिए कितनी भारी पड़
रही है ?
इस व्यवस्था पर किसान ने जबरदस्त और जोरदार तरीके से इसका विरोध किया ! राज्य सरकार को फैसला पलटना पड़ा और किसानो के भोपाल प्रदर्शन के बाद रोक लगा दी । केन्द्री कृषि मंत्री
शिवराज सिंह चौहान ने कुछ दिन पहले इसे बड़े जोर से कृषि क्षेत्र की नई क्रांति बता कर इसको लॉन्च
किया था !
परंतु कृषि मंत्री यह भूल गए की भारत का किसान अभी इतना स्मार्ट या Ai समझने वाला या ऑनलाइन
खरीदारी करने में सक्षम अभी नहीं हुआ है! यदि किसी किसान को एक हेक्टर में मक्का लगाई है और उसको
खाद खरीदना है तो उसको ऑनलाइन खरीदी करनी होगी अर्थात उसको टोकन लेना होगा! यदि कपड़ा
जूता चप्पल खरीदना होता तो एक आसान है !
परंतु मध्य प्रदेश में 82 लाख किसान पंजीकृत है! और सबको खाद की जरूरत होती है! इतने सारे किसानों
को खरीफ की फसल के बुवाई में केवल 7 दिन मिलते हैं और इस 7 दिन में 82 लाख किसानों को टोकन
ऑनलाइन लेना है! यह कितनी दुविधा वाला काम है वेबसाइट पर कितना लोड आएगा और यह व्यवस्था
चरमरा जाती है!
टोकन प्रणाली में प्रत्येक कंपनी के उर्वरक की उपलब्धता नहीं दिखती है!
खाद अपने तरीके से खरीदने की स्वतंत्रता इस प्रणाली में नहीं है! कई फर्टिलाइजर विक्रेताओं के नाम भी
इसमें नहीं दिखते हैं! इस प्रणाली में सबसे ज्यादा दोष यह है कि यदि कोई किसान जैसे मनीष बाफना के
नाम एक कृषि भूमि इंदौर में है l और एक दूसरे जिले जैसे धार में दूसरी कृषि भूमि है !मगर उस पर मनीष
कुमार बाफना लिखा है! परंतु आधार कार्ड एक है समान है फिर भी आपको उर्वरक नहीं मिलेगा ! क्योंकि
यह दोनों फार्मर आईडी में जुड़ते नहीं है!
इस प्रकार की कई त्रुटियां इस प्रणाली में सम्मिलित है जो कि किसानों के लिए बहुत ही पेचीदा सर दर्द
वाला काम है
किसान वैसे ही बीज दवाई ट्रैक्टर ;वातावरण कम वर्षा अधिक वर्षा से लड़ाई करता रहता है !और ऐसे में
यह प्रणाली उसको दुख देने वाली है! उर्वरक की कालाबाजारी रोकने के लिए इस प्रणाली को लागू करना
सरकार बताती है
कोई भी प्रणाली यदि वह किसान को परेशान करती है या उसकी भटकाती है तो वह बेहतर और अच्छी
नहीं मानी जाएगी!
MP सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में *ई-विकास पोर्टल* के जरिए ई-टोकन सिस्टम लागू किया है।
मकसद था लाइन खत्म करना और कालाबाजारी रोकना।
*ई-टोकन कैसे काम करता है*
1. किसान `evikas.mpkrishi.mp.gov.in` पर आधार + OTP से टोकन बुक करता है
2. टोकन 3 दिन तक वैध रहता है
3. खाद जमीन के रकबे और फसल के आधार पर मिलेगी
4. 1 महीने में अधिकतम 50 बोरी की सीमा
*मुख्य कमियां क्या हैं?*
फार्मर ID की बाध्यता – सबसे बड़ी समस्या*
– बिना Farmer ID के खाद नहीं मिलेगी
– सीहोर में 1 लाख 45 हजार किसानों में से सिर्फ 13,445 के पास ही ID है
– खसरा-आधार लिंक नहीं है, KYC नहीं है
– किराए/बटाई पर खेती करने वालों की ID बनी ही नहीं
डिजिटल साक्षरता और टेक्निकल दिक्कतें*
– एंड्रॉयड मोबाइल और इंटरनेट जरूरी है। कई किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं
– OTP नहीं आ रहा, पोर्टल बार-बार हैंग हो रहा
– यूरिया के अलावा DAP, NPK की बुकिंग में भी दिक्कत
– किसानों को MP ऑनलाइन/साइबर कैफे के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और 100-200 रुपये देने पड़ रहे
समय और प्रक्रिया की दिक्कत*
– टोकन सिर्फ 3 दिन वैध। अगर 72 घंटे में खाद नहीं ली तो निरस्त
– पोर्टल सुबह 7 से शाम 8 बजे ही खुलता है
– बुवाई के समय सीजन के अंत में सिस्टम लागू किया गया 9751ec76
जमीनी दिक्कतें*
– पोर्टल पर कई किसानों की जमीन दर्ज ही नहीं है। तब SDM के पास आवेदन करना पड़ता है
– सहकारी समिति का सदस्य नहीं है तो दूसरी दुकान ढूंढनी पड़ती है
किसान क्यों नाराज हैं?
1. *"नई चीज थोपना"*: किसानों का कहना है पहले ID बनाकर दो, फिर सिस्टम लागू करो। एकदम से
थोपना गलत है
2. *लाइन खत्म नहीं हुई, मुसीबत बढ़ी*: लाइन की जगह अब मोबाइल स्क्रीन और साइबर कैफे की लाइन
लग रही है
3. *खर्च बढ़ा*: टोकन प्रिंट, फोटोकॉपी, सेंटर की फीस – 40km का चक्कर
4. *गलत समय पर लागू*: जब खाद की सबसे ज्यादा जरूरत थी तब नहीं, अब सीजन के अंत में लागू
किया
5. *डिजिटल डिवाइड*: जो किसान पढ़े-लिखे नहीं हैं या बुजुर्ग हैं वो बिल्कुल फंस गए हैं *सरकार का
दावा*
सरकार कह रही है इससे पारदर्शिता आएगी, कालाबाजारी रुकेगी, लाइन खत्म होगी। और अब पूरा कोटा
एक साथ मिलेगा।
ई-टोकन का आइडिया अच्छा है, पर *ID न होना + डिजिटल दिक्कत + गलत टाइमिंग* के कारण किसान
परेशान हैं। सीहोर, रतलाम, आगर मालवा जैसे जिलों में विरोध हो चुका है