
भोपाल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज स्मार्ट पार्क में नीम का पौधा लगाया। इस अवसर पर नरयावली विधायक श्री प्रदीप लारिया भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान अपने संकल्प के परिपालन में प्रतिदिन पौधा रोपण करते हैं। एंटीबायोटिक तत्वों से भरपूर नीम को सर्वोच्च औषधिके रूप में जाना जाता है। नीम स्वाद में भले ही कड़वा हो, लेकिन इससे होने वाले लाभ अमृत के समान होते हैं। पर्यावरण की दृष्टि से भी नीम बहुत उपयोगी है।
किसानो के हित में राज्य सरकार ने लिए कई निर्णय- मुख्यमंत्री श्री चौहान- मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अविवादित नामांतरण के लिए स्थापित नई व्यवस्था की जन-सामान्य को जानकारी देने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाए। भूमि संबंधी दस्तावेजों में त्रुटि सुधार के लिए अगस्त माह में एक सप्ताह का विशेष रिकार्ड शुद्धिकरण सप्ताह मनाया जाएगा। रिकॉर्ड के कम्प्यूटरीकरण के दौरान हुई त्रुटियों के सुधार के लिए किसानों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान राजस्व, कृषि, विद्युत, सहकारिता, पशुपालन विभाग से संबंधित दिन-प्रतिदिन के कार्यों में आने वाली समस्याओं के संबंध में किसान मंच के पदाधिकारियों से मंत्रालय में चर्चा कर रहे थे। बैठक में किसान प्रतिनिधियों के साथ कृषि उत्पादन आयुक्त श्री के. के. सिंह, अपर मुख्य सचिव पशुपालन श्री जे.एन. कंसोटिया, अपर मुख्य सचिव किसान-कल्याण श्री अजीत केसरी, प्रमुख सचिव ऊर्जा श्री संजय दुबे, प्रमुख सचिव राजस्व श्री मनीष रस्तोगी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।मुख्यमंत्री श्री चौहान से किसान मंच के प्रतिनिधियों की चर्चा के मुख्य बिन्दु
रजिस्ट्री होते ही नामांत्रित दस्तावेज उपलब्लध कराये जाएं। फौती नामंत्रण समय-सीमा में पटवारियों द्वारा गाँव में पंचायत के प्रस्ताव से किया जाए। पटवारी ही कंप्यूटर रिकार्ड में दर्ज करें इसकी जवाबदारी निश्चित की जाए। अविवादित बँटवारा आपसी सहमति के आधार पर नोटरी कराने पर तहसीलदार द्वारा किया जाए। विभाग द्वारा खसरा बी-1 में की गई त्रुटियों को विभाग द्वारा सुधारा जाए। खेतों के परंपरागत रास्तों का नक्शे में अंकन किया जाए। आर.आई. एवं पटवारियों को गृह तहसील में पदस्थ नहीं किया जाए। पटवारियों को राजस्व के कार्य के लिए ही अधिकृत किया जाए। अन्य काम एवं प्रोटोकॉल के लिए अलग से अधिकारियों की नियुक्ति की जाए। पहाड़ों पर गिट्टी खनन की परमिशन ऐसे स्थान पर दी जाए, जहाँ खनन के पश्चात उसका उपयोग जल संग्रह के लिए हो सके। सहकारी संस्थाओं का समस्त कार्य व्यवहार कंप्यूटरीकृत किया जाए तथा पारदर्शिता लागू की जाए।