मनीष बाफना -राज्य सरकार गत वर्ष किसानों से उत्पादित मूंग की खरीदी यह कह कर इनकार कर रही थी की मूंग में किसान जहरीला रसायन पैराक्वाट डाइक्लोराइड अधिक उपयोग कर रहा है जो की कैंसर पैदा करने के लिए जिम्मेदार होता है। मानव जाति के लिए यह जहरीला है। समर्थन मूल्य पर मूंग की खरीदी करने से इनकार कर दिया था |
परंतु हजारो किसानो के द्वारा जोरदार विरोध करने के कारण सरकार को गत वर्ष मजबूरी में मूंग की सरकारी खरीदी करनी पड़ी।
इस वर्ष सरकार ने घोषणा की है कि वह केवल 25% ही मूंग किसानों से खरीदी कर सकेगी। सरकार के इस निर्णय से मूंग किसानो ने जो मध्य प्रदेश के 5 जिलों में अधिक है। सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए आंदोलन की शुरुआत कर दी ।मोहन सरकार के खिलाफ आवाज उठाना शुरू हो चुकी है।
इसी बीच केंद्र सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर खरपतवार नाशक पैरा क्वार्ट डाय क्लोराइड पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। यह वही खरपतवार नाशक रसायन है जो मूंग की खेती में अधिक से अधिक उपयोग होता है। हरदा जिले के कृषि अधिकारियों ने भी गत वर्ष बताया था कि, मूंग की फसल को जल्दी परिपक्व अर्थात जल्दी पैदावार के उपयोग में यह खरपतवार अधिक से अधिक किसान अपने खेतों में उपयोग कर रहा है । हरदा जिले के कृषि उपसंचालक ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर अभी बताया था कि ,इस रसायन को प्रतिबंधित किया जाए जो कि कैंसर पैदा करने में सहायक है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने बताया है कि पैरा क्वार्ट डाय क्लोराइड 70 से अधिक देशों में प्रतिबंधित है या इसके उपयोग पर कड़ी पाबंदी लगाई गई है । समिति ने चिंता के कई और कारण भी बताएं जिससे कि दस्तावेजों के आधार पर सेहत पर इसका बुरा असर ,जहर फैलने की लगातार घटना और इससे होने वाली बीमारी इसका कोई खास इलाज न होना।
इस रसायन को घातक सिद्ध करता है।
13 जुलाई 2026 में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह रसायन अत्यंत जहरीला है। जिससे मानव जीवन को खतरा पैदा हो गया है। भारत सरकार ने इसके खतरों को देखते हुए इस पर पूर्ण प्रतिबंध (Ban) लगा दिया है। अब भारत में इसके निर्माण, आयात, बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह रोक है।
इसके संपर्क में आने या गलती से शरीर के अंदर चले जाने पर यह फेफड़ों, गुर्दों और लीवर को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है, जिससे मृत्यु तक हो सकती है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसका कोई ज्ञात एंटीडोट (उपचार) उपलब्ध नहीं है।
परंतु मध्य प्रदेश के कई किसान अपनी मूंग की खेती में इसका बहुत उपयोग करते हैं।
गतवर्ष राज्य सरकार ने मूंग की खरीदी में पैरा क्वार्ट डाय क्लोराइडपरडालने के कारण खरीदी से इनकार करने पर मूंग उत्पादक किसानों ने सरकार के इस निर्णय का जोर- शोर से विरोध करना शुरू कर दिया था ।
वैसे भी मूंग खरीदी में नर्मदा पुरम एवं हरदा जिले के किसान का पंजीयन ज्यादा होता है और और विरोध करने वाले किसानों की संख्या भी इस इस क्षेत्र से ज्यादा है। राजनीतिक रूप से सक्रिय नेताओं की संख्या भी ज्यादा अधिक है l बताया जाता है कि प्रदेश सरकार ने जहरीले कीटनाशक के अधिक से अधिक उपयोग होने के कारण प्रदेश में किसानों से मूंग की खरीदी 25% कर दी है। परंतु समर्थन मूल्य पर मूंग की कम खरीदी केवल 25% के आदेश में इस खरपतवार नाशक के उपयोग
के संबंध में कोई भी कारण नहीं दर्शाया गया है| परंतु आधिकारिक रूप से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य सरकार और केंद्र सरकार इस खरपतवार नाशक को मुद्दा बनाते हुए मूंग की खरीदी कम करना चाह रही है
परंतु मूंग उत्पादक किसानों को यह बात गले से नीचे नहीं उतर रही है कि केवल यही रसायन डालने के कारण सरकार मूंग खरीदी नहीं कर रही है। जबकि कई किसान नेताओं का कहना है कि ,मूंग में किसानों द्वारा इसका उपयोग इतना नहीं होता है जितना बताया जाता है।
जबकि अन्य फसल में जैसे टमाटर ,मिर्ची, बैंगन फूलगोभी पत्ता गोभी में इससे भी खतरनाक कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है और वह भी कीटनाशक कई देश में प्रतिबंध है। परंतु किसानों का मूंग ना खरीदने का यह कारण समझ से दूर है ।
किसानों द्वारा मूंग की खरीदी न होने के कारण लगातार चक्का जाम एवं ज्ञापन का कार्य निरंतर चालू है । और देखने में आ रहा है कि सरकार भी अब झुकने को तैयार नहीं है । मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने अभी तक कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया है ,नहीं किसी प्रकार की चर्चा किसानो से की है , कोई ठोस अश्वशन नहीं दिया गया है। ऐसे में प्रदेश के पांच जिले जहां मूंग की खेती की जाती है। वहां पर किसान अपना आंदोलन तेज कर सकते हैं। नई दिल्ली में भी इस खरपतवार नाशक को पूर्णतया बंद करने का विचार कर लिया है ।