निजी कंपनी का बीज फेल तो FIR, सरकारी बीज फेल तो सिर्फ नोटिस

अमानक बीज के 10% मामलों में से 35%
हिस्सेदारी खुद सरकारी बीज की है। किसान जाए तो जाए कहाँ

Manish bafana -केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान कई मंचों से कहते हैं की घटिया बीज बेचने वालों पर कड़ी
कार्रवाई करते हुए जेल भेजेंगे और उनको फांसी तक की सजा दिलवाएंगे |
प्राप्त जानकारी के अनुसार घटिया बीज बेचने में निजी संस्था कंपनियों से बराबरी की टक्कर देने में सरकारी बीज कंपनियां भी
पीछे नहीं है l
निजी प्राइवेट कंपनियों का बीज अ मानक हो जाता है तो उसके  कठोर कार्रवाई जैसे उसका लाइसेंस निरस्त ,गोदाम में पड़ा
माल मंडी में बेचना पड़ जाता है | आवश्यक वस्तु अधिनियम में FIR कर दी जाती है, जहां से उनकी जमानत होना भी
मुश्किल हो जाती है ! कंपनियों का नाम बदनाम हो जाता है और उसको फिर वापस से व्यापार करना हो तो नए नाम से करना
पड़ता है ! परंतु दूसरी ओर सरकारी बीज उत्पादन संस्थाएं घटिया और नकली  बीज बेचने पर उनकी तो बल्ले बल्ले है | उनके
ऊपर किसी प्रकार का कोई FIR नहीं, ना कोई जेल ना कोई कोर्ट——–
रक्षक बनाकर भक्षक बनकर खेतों की  बाड़ खा रहे हैं ! महाराष्ट्र में मध्य प्रदेश की प्राइवेट कंपनियां पर गलत बीज  देने पर
सरकार ने ऐसी कार्यवाही की कंपनियों के मालिक को  कोर्ट में जमानत लेने में भी पसीने छूट रहे हैं! वही सरकारी नियंत्रित बीजकंपनियां जिसका बीज फेल होने  का प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है | उस पर कोई  कार्यवाहि नहीं,, बदले में उन सब
अधिकारियों का प्रमोशन, और,,, वेतन वृद्धि हो रही है ! क्या केंद्र सरकार के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान इन सरकारी बीज
कंपनियां को कब जेल भेजेंगे ? ऐसा क्या कानून प्रावधान है ? कि सरकारी कंपनियों को नकली बीज बेचने की स्वतंत्रता है और
उसका अधिकार है—— जिससे किसान आत्महत्या कर रहे हैं  ! 
बड़े सरकारी निगमों का हिसाब ––

  1. मध्य प्रदेश राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम (MP बीज निगम)
    ये अपने प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी सप्लायर है।
  • फेल प्रतिशत: 9 से 12%
  • अभी 9 दिसंबर 2024 को ही डिंडोरी जिले में MP बीज निगम के बीज का सैंपल जबलपुर लैब में अमानक पाया गया। उप संचालक कृषि ने खुद मैनेजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया और उस लॉट
    की बिक्री, भंडारण, ट्रांसपोर्ट सब बंद कर दिया। ये बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 की धारा 15 का उल्लंघन
    था।
  • MP कृषि विभाग की अपनी रिपोर्ट कहती है कि हर साल औसत 3000 सैंपल लिए जाते हैं, जिसमें 275
    अमानक निकलते हैं। इसमें सबसे ज्यादा शिकायतें MP बीज निगम और सहकारी समितियों की ही होती
    हैं।
  1. राष्ट्रीय बीज निगम – NSC
    ये केंद्र सरकार की कंपनी है, पूरे भारत में 600 किस्म के 60 फसलों के बीज बनाती है।
  • फेल प्रतिशत: 5 से 8%
  • NSC का बीज सीधे फेल कम होता है, पर इसका बीज ज्यादातर दूसरे किसानों से अनुबंध पर बनवाया जाता है। गुणवत्ता कंट्रोल में चूक होने से अंकुरण कम निकल जाता है।
  • किसानों की शिकायत रहती है कि NSC की थैलियों में मिक्सिंग का बीज मिलता है, जैसे गेहूं HI-1544
    की जगह पुरानी लोकल वैरायटी।
  1. महाराष्ट्र का महाबीज (MahaBeej) – जो में भी बिकता है
    महाबीज सोयाबीन के लिए MP में बहुत बिकता है।
  • फेल प्रतिशत: 7 से 10%
  • MP के सीमावर्ती जिले खरगोन, बुरहानपुर, धार में महाबीज के सोयाबीन JS-335 के कई लॉट फेल
    पाए गए हैं। लेबल पर 80% अंकुरण लिखा होता है, लैब में 60-65% ही निकलता है।

सरकारी बीज 100% शुद्ध नहीं है।*
फर्क सिर्फ इतना है कि निजी कंपनी का बीज नकली होने पर FIR कर दी जाती है , सरकारी का होने पर
नोटिस देकर मामला दबा दिया जाता है।

सरकारी बीज नकली क्यों होता है?

पुराना स्टॉक: पिछले साल का बचा बीज नई थैली में पैक कर देना।

प्रोसेसिंग में लापरवाही: ग्रेडिंग, सुखाई ठीक से न होना, इसलिए नमी ज्यादा रह जाती है।

टारगेट का दबाव: निगमों पर लाखों क्विंटल बेचने का टारगेट होता है, तो गुणवत्ता में समझौता हो
जाता है।
इफको (IFFCO) और कृभको (KRIBHCO) को खाद वाली कंपनी समझते हैं, पर ये बीज
भी बेचती हैं और इनके भी सैंपल फेल होते हैं।

. इफको (IFFCO) और कृभको (KRIBHCO) – ये बीज कैसे बेचते हैं ?*
ये खुद बीज नहीं बनातीं। ये दूसरी छोटी कंपनियों या अपने किसान उत्पादक संगठनों से बीज लेकर अपनी
*सहकारी समितियों (PACS) के माध्यम से बेचती हैं। MP में करीब 4536 प्राथमिक सहकारी समितियां
हैं, इन्हीं पर इनका बीज आता है ।
फेल कितना होता है ?
सरकारी आंकड़ों में इनको अलग से नहीं दिखाया जाता, इनको “सहकारी क्षेत्र” में गिना जाता है।

  • सहकारी क्षेत्र (इफको + कृभको + बीज संघ) का फेल प्रतिशत: 6 से 8%
     बीज निगम, राष्ट्रीय बीज निगम (NSC), महाबीज, इफको और कृभको पर अमानक बीज देने पर एक भी
    FIR दर्ज नहीं हुई है।*
    निजी कंपनियों पर FIR होती है, सरकारी पर सिर्फ नोटिस।
    1.  MP बीज निगम: बीज एवं फार्म विकास निगम का बीज लैब में अमानक पाया गया। उप संचालक
    कृषि ने सिर्फ कारण बताओ नोटिस जारी किया और लॉट की बिक्री रोक दी। FIR नहीं हुई। जबकि बीज
    नियंत्रण आदेश 1983 की धारा 15 का उल्लंघन था, जिसमें FIR हो सकती थी।

2.  राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) / महाबीज: कृषि विभाग की सालाना रिपोर्ट में इनके नाम “अमानक पाए
गए संस्थानों” की लिस्ट में आते हैं, पर कार्रवाई के कॉलम में सिर्फ लिखा होता है – “चेतावनी दी गई”।
3.  इफको-कृभको: इन पर तो खाद के मामले में भी FIR नहीं होती, बीज के मामले में तो बिल्कुल नहीं।
इनको “सहकारी” मानकर छोड़ दिया जाता है।
जबकि 2025-26 में MP में अमानक बीज पर 11 FIR हुईं – वो सब छोटी निजी कंपनियों और दुकानदारों
पर हुईं।
FIR क्यों नहीं होती? – 4 बड़े कारण
कारण 1: सरकार खुद ही मालिक, खुद ही पुलिस
बीज की सैंपलिंग करने वाला बीज निरीक्षक कृषि विभाग का कर्मचारी है। और MP बीज निगम भी उसी
कृषि विभाग के अधीन है। तो एक ही विभाग का अधिकारी अपने ही विभाग की कंपनी पर FIR कैसे
करेगा? वो सिर्फ नोटिस देकर खानापूर्ति कर देता है।
कारण 2: कानून में ही छेद है
बीज अधिनियम 1966 के अनुसार, सरकारी बीज निगम को “बीज प्रमाणीकरण” में छूट मिली हुई है।
उनका बीज “प्रमाणित बीज” माना जाता है, इसलिए लैब में फेल होने पर भी वो कहते हैं – “भंडारण में
खराब हुआ होगा, उत्पादन में नहीं।” और बच जाते हैं।
कारण 3: राजनैतिक और अफसरशाही दबाव
MP बीज निगम के अध्यक्ष अक्सर IAS अधिकारी होते हैं। NSC केंद्र सरकार की नवरत्न कंपनी है। इफको-
कृभको के बोर्ड में बड़े नेता बैठे हैं। जिला कृषि अधिकारी की हिम्मत नहीं कि वो सीधे इन पर FIR कर दे।
उसका ट्रांसफर हो जाएगा।
कारण 4: FIR का प्रावधान ही कमजोर
निजी दुकानदार पर FIR बीज नियंत्रण आदेश की धारा 19 में होती है। पर सरकारी निगम पर कार्रवाई
करने के लिए पहले संचालक कृषि, भोपाल से अनुमति लेनी पड़ती है। फाइल भोपाल जाती है, वहीं घूमती
रहती है।
मतलब साफ – कानून दो तरह का है।

  • किसान या छोटा दुकानदार अगर 1 बोरी नकली बीज बेच दे तो जेल।
  • सरकारी निगम हजारों क्विंटल अमानक बीज बेच दे तो सिर्फ नोटिस।
    इसी कारण मध्य प्रदेश में 10% बीज फेल होने के बाद भी किसान को न्याय नहीं मिलता। वो सहकारी समिति
    में जाता है, वहां वही अमानक सरकारी बीज फिर से मिलता है।

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