हरित मालव टीम -पुणे: महाराष्ट्र राज्य के कृषि विभाग को किसानों से सोयाबीन के बीजों की खराब गुणवत्ता को लेकर शिकायतों में भारी वृद्धि देखने को मिल रही है, राज्य भर में 3,600 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं और मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान लगभग 6,000 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है।
मध्य प्रदेश की कई बीज कंपनियों ने सोयाबीन का प्रमाणित बीज उत्पादित करते हुए मध्य प्रदेश के अतिरिक्त कई राज्यों विशेष कर महाराष्ट्र में किसानों को बेचा।

बताया जाता है कि महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में बीज का अंकुरण ना होने के कारण किसानों ने कृषि विभाग में अपनी शिकायत दर्ज कराई है !
महाराष्ट्र सरकार ने मध्य प्रदेश की 15 से अधिक सीड कंपनियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं और कुछ कंपनियों पर एफआईआर दर्ज भी हो चुकी है।
इस प्रकार की कार्रवाई से मध्य प्रदेश बीज कंपनियों में हड़कंप मच गया है।
मध्य प्रदेश की कई कंपनियों ने बताया है कि, प्रमाणित बीच का उत्पादन सरकारी देखरेख में होता है। वही बीज मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में भी गया परंतु वहां पर किसी प्रकार की शिकायत नहीं आई। महाराष्ट्र में 6000 हेक्टर में कुछ शिकायत दर्ज की गई है परंतु वहां पर कम बारिश और काम नमी होने के कारण बीच का अंकुरण प्रभावित हुआ । परंतु जिस प्रकार से बीज कंपनियों पर एफआईआर दर्ज की गई है।
कंपनियों ने बताया कि कम बारिश होने पर किसानों ने बुवाई की और काफी दिन तक बारिश नहीं हुई जिससे मिट्टी की नमी समाप्त हो गई और अंकुरण प्रभावित हुआ।
मध्य प्रदेश सीड एसोसिएशन के सीईओ विजय ओसवाल ने बताया कि संगठन ने महाराष्ट्र सरकार को अपना पक्ष रखते हुए समस्त दस्तावेज प्रस्तुत किये।
बताया गया है कि अंकुरण से जुड़ी शिकायत सिर्फ एक या दो कंपनियों तक सीमित नहीं है बल्कि कई कंपनियों और सोयाबीन की कई किस्म में देखी गई है , जो की मौसम की स्थिति के कारण अंकुरण की समस्या उत्पन्न हुई है।
मध्य प्रदेश बीज कंपनियों ने अपना पक्ष रखते हुए महाराष्ट्र सरकार को अवगत कराया की
कंपनियां ने जवाब में बताया कि ,इस साल कई इलाकों में बहुत ज्यादा बारिश की वजह से जल जमा हुआ । मिट्टी में ऑक्सीजन कम हो गई ,और बीच सड़ गया। और वहीं कुछ इलाकों में कम बारिश और मिट्टी में नमी की कमी से भी बीजों के अंकुरण पर बुरा असर डाला। बुवाई के बाद भी मिट्टी का तापमान अत्यधिक होने से अंकुरण प्रक्रिया पर बुरा असर पड़ा।अब कंपनियों की स्थिति यह है कि, इन तथ्यों को किसी भी प्रकार से वहां की सरकार सुनने को तैयार है, ना कृषि विभाग इसको मानने को तैयार है। क्योंकि किसानो के आगे सभी प्रकार के प्रमाण और कारण सब शून्य हो जाते हैं । क्योंकि सरकार हमेशा किसानो से संबंधित खाद बीज दवाई पर हमेशा कंपनी को ही दोषी देती है।जबकि प्रमाणित बीज का उत्पादन हमेशा सरकारी निगरानी में होता हैबीच का लैब टेस्ट भी सरकार करती है उसके बाद ही बीज बाजार में बेचने की मान्यता होती है।
ऐसे में मध्य प्रदेश की कई कंपनियां सदमे में है भौचक है, उनको लगता है कि वातावरण की वजह से बीज का अंकुरण ना होने के कारण उनको परेशान किया जा रहा है।यदि इसी प्रकार की प्रक्रिया निरंतर चलती रही तो बीज उत्पादन करने का काम कंपनियां बंद कर सकती है जिससे बीज की समस्या पूरे भारत में आ सकती है ।
किसानों ने की मुआवजे और कार्रवाई की मांग
किसानों ने मांग की कि जिन बीज कंपनियों के बीज क्वालिटी परीक्षण में मानकों पर खरे नहीं उतरे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. साथ ही प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए और भविष्य में गुणवत्ता जांच पूरी होने के बाद ही बीजों की बिक्री सुनिश्चित की जाए.